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भीष्म पर्व
अध्याय २२
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वासुदेव उवाच
य एष गोप्ता प्रतपन्वलस्थो; यो नः सेनां सिंह इवेक्षते च |  १५   क
स एष भीष्मः कुरुवंशकेतु; र्येनाहृतास्त्रिंशतो वाजिमेधाः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति