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शान्ति पर्व
अध्याय २१९
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नमुचिरु उवाच
यां यामवस्थां पुरुषोऽधिगच्छे; त्तस्यां रमेतापरितप्यमानः |  १७   क
एवं प्रवृद्धं प्रणुदेन्मनोजं; सन्तापमाय़ासकरं शरीरात् ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति