menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय २१७
chevron_left
chevron_right
वलिरु उवाच
कौमारमेव ते चित्तं तथैवाद्य यथा पुरा |  २८   क
समवेक्षस्व मघवन्वुद्धिं विन्दस्व नैष्ठिकीम् ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति