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शान्ति पर्व
अध्याय २१५
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भीष्म उवाच
यैः कैश्चित्संमतो लोके गुणैः स्यात्पुरुषो नृषु |  ९   क
भवत्यनपगान्सर्वांस्तान्गुणाँल्लक्षय़ामहे ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति