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वन पर्व
अध्याय २१३
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मार्कण्डेय़ उवाच
अग्निश्चैतैर्गुणैर्युक्तः सर्वैरग्निश्च देवता |  ३३   क
एष चेज्जनय़ेद्गर्भं सोऽस्या देव्याः पतिर्भवेत् ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति