आदि पर्व  अध्याय २१३

वैशम्पाय़न उवाच

एकवर्षान्तरास्त्वेव द्रौपदेय़ा यशस्विनः |  ७९   क
अन्वजाय़न्त राजेन्द्र परस्परहिते रताः ||  ७९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति