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आदि पर्व
अध्याय २११
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वैशम्पाय़न उवाच
दृष्ट्वैव तामर्जुनस्य कन्दर्पः समजाय़त |  १५   क
तं तथैकाग्रमनसं कृष्णः पार्थमलक्षय़त् ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति