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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २१
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व्राह्मण उवाच
दिव्यादिव्यप्रभावेन भारती गौः शुचिस्मिते |  १८   क
एतय़ोरन्तरं पश्य सूक्ष्मय़ोः स्यन्दमानय़ोः ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति