menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २०४
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
एतदर्थं मम प्राणा भार्या पुत्राः सुहृज्जनाः |  २२   क
सपुत्रदारः शुश्रूषां नित्यमेव करोम्यहम् ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति