आदि पर्व  अध्याय २०३

नारद उवाच

तथा देवनिकाय़ानामृषीणां चैव सर्वशः |  २७   क
मुखान्यभिप्रवर्तन्ते येन याति तिलोत्तमा ||  २७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति