शान्ति पर्व  अध्याय २०२

भीष्म उवाच

ततो विष्णुर्महातेजा वाराहं रूपमाश्रितः |  १५   क
अन्तर्भूमिं सम्प्रविश्य जगाम दितिजान्प्रति ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति