विराट पर्व  अध्याय २०

द्रौपद्यु उवाच

ममेह भीम कैकेय़ी रूपाभिभवशङ्कय़ा |  १६   क
नित्यमुद्विजते राजा कथं नेय़ादिमामिति ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति