आश्वमेधिक पर्व  अध्याय २०

वासुदेव उवाच

कं नु लोकं गमिष्यामि त्वामहं पतिमाश्रिता |  ३   क
न्यस्तकर्माणमासीनं कीनाशमविचक्षणम् ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति