menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय २
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
भीष्मश्च निहतो यत्र लोकनाथः प्रतापवान् |  ३०   क
शिखण्डिनं समासाद्य मृगेन्द्र इव जम्वुकम् ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति