वन पर्व  अध्याय १९८

व्याध उवाच

पापान्यवुद्ध्वेह पुरा कृतानि; प्राग्धर्मशीलो विनिहन्ति पश्चात् |  ५०   क
धर्मो व्रह्मन्नुदते पूरुषाणां; यत्कुर्वते पापमिह प्रमादात् ||  ५०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति