menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १९६
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
एवं कृच्छ्रेण महता पुत्रं प्राप्य सुदुर्लभम् |  १७   क
चिन्तय़न्ति सदा वीर कीदृशोऽय़ं भविष्यति ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति