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शान्ति पर्व
अध्याय १९१
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भीष्म उवाच
चतुर्णां लोकपालानां शुक्रस्याथ वृहस्पतेः |  ५   क
मरुतां विश्वदेवानां साध्यानामश्विनोरपि ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति