menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय १८८
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
अपर्वणि महाराज सूर्यं राहुरुपैष्यति |  ७९   क
युगान्ते हुतभुक्चापि सर्वतः प्रज्वलिष्यति ||  ७९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति