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शान्ति पर्व
अध्याय १८८
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भीष्म उवाच
हन्त वक्ष्यामि ते पार्थ ध्यानय़ोगं चतुर्विधम् |  १   क
यं ज्ञात्वा शाश्वतीं सिद्धिं गच्छन्ति परमर्षय़ः ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति