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उद्योग पर्व
अध्याय १८७
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भीष्म उवाच
यदि भीष्मविनाशाय़ काश्ये चरसि वै व्रतम् |  ३४   क
व्रतस्था च शरीरं त्वं यदि नाम विमोक्ष्यसि |  ३४   ख
नदी भविष्यसि शुभे कुटिला वार्षिकोदका ||  ३४   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति