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शान्ति पर्व
अध्याय १८५
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भीष्म उवाच
एष ते प्रभवो राजञ्जगतः सम्प्रकीर्तितः |  २७   क
निखिलेन महाप्राज्ञ किं भूय़ः श्रोतुमिच्छसि ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति