सौप्तिक पर्व  अध्याय १८

वासुदेव उवाच

न तन्मनसि कर्तव्यं न हि तद्द्रौणिना कृतम् |  २६   क
महादेवप्रसादः स कुरु कार्यमनन्तरम् ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति