उद्योग पर्व  अध्याय १७८

भीष्म उवाच

यच्चापि कत्थसे राम वहुशः परिषत्सु वै |  ३६   क
निर्जिताः क्षत्रिय़ा लोके मय़ैकेनेति तच्छृणु ||  ३६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति