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वन पर्व
अध्याय १७२
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः पितामहश्चैव लोकपालाश्च सर्वशः |  १४   क
भगवांश्च महादेवः सगणोऽभ्याय़यौ तदा ||  १४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति