menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
chevron_left
chevron_right
उपमन्युरु उवाच
जन्तोर्विशुद्धपापस्य भवे भक्तिः प्रजाय़ते |  १५८   क
उत्पन्ना च भवे भक्तिरनन्या सर्वभावतः ||  १५८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति