आदि पर्व  अध्याय १६८

गन्धर्व उवाच

मन्त्रपूतेन च पुनः स तमभ्युक्ष्य वारिणा |  ४   क
मोक्षय़ामास वै घोराद्राक्षसाद्राजसत्तमम् ||  ४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति