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द्रोण पर्व
अध्याय १६५
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कृप उवाच
एतन्नारोचय़द्वाक्यं कुन्तीपुत्रो धनञ्जय़ः |  ११२   क
अरोचय़ंस्तु सर्वेऽन्ये कृच्छ्रेण तु युधिष्ठिरः ||  ११२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति