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शान्ति पर्व
अध्याय १६५
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भीष्म उवाच
ततः स विदितो राज्ञः प्रविश्य गृहमुत्तमम् |  १   क
पूजितो राक्षसेन्द्रेण निषसादासनोत्तमे ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति