वन पर्व  अध्याय १६३

अर्जुन उवाच

स तु मामव्रवीद्राजन्मम पूर्वपरिग्रहः |  २२   क
मृगय़ाधर्ममुत्सृज्य किमर्थं ताडितस्त्वय़ा ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति