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वन पर्व
अध्याय १६०
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वैशम्पाय़न उवाच
एवमेतदनिर्देश्यं मार्गमावृत्य भानुमान् |  ३३   क
पुनः सृजति वर्षाणि भगवान्भावय़न्प्रजाः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति