वन पर्व  अध्याय १६

वासुदेव उवाच

न कुप्यवेतनी कश्चिन्न चातिक्रान्तवेतनी |  २२   क
नानुग्रहभृतः कश्चिन्न चादृष्टपराक्रमः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति