अनुशासन पर्व  अध्याय १६

वासुदेव उवाच

भूराद्यान्सर्वभुवनानुत्पाद्य सदिवौकसः |  ३५   क
विभर्ति देवस्तनुभिरष्टाभिश्च ददाति च ||  ३५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति