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वन पर्व
अध्याय १५८
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वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा तु राजानं भीमसेनमभाषत |  ४५   क
नैतन्मनसि मे तात वर्तते कुरुसत्तम |  ४५   ख
यदिदं साहसं भीम कृष्णार्थे कृतवानसि ||  ४५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति