menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १५५
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
प्रहृष्टमनसं ज्ञात्वा वासुदेवं महावलम् |  ५   क
अव्रवीदर्जुनो राजन्नातिहृष्टमना इव ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति