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कर्ण पर्व
अध्याय १५
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सञ्जय़ उवाच
अस्त्रैरस्त्राणि संवार्य छित्त्वा सर्वाय़ुधानि च |  ३४   क
प्राप्तमप्यहितं द्रौणिर्न जघान रणेप्सय़ा ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति