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विराट पर्व
अध्याय १५
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द्रौपद्यु उवाच
न कीचकः स्वधर्मस्थो न च मत्स्यः कथञ्चन |  २५   क
सभासदोऽप्यधर्मज्ञा य इमं पर्युपासते ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति