वन पर्व  अध्याय १४९

वैशम्पाय़न उवाच

स्त्रिय़ा मूढेन लुव्धेन वालेन लघुना तथा |  ४४   क
न मन्त्रय़ेत गुह्यानि येषु चोन्मादलक्षणम् ||  ४४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति