अनुशासन पर्व  अध्याय १४६

वासुदेव उवाच

पूज्यमाने ततस्तस्मिन्मोदते स महेश्वरः |  १८   क
सुखं ददाति प्रीतात्मा भक्तानां भक्तवत्सलः ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति