वन पर्व  अध्याय १४५

वैशम्पाय़न उवाच

वलिहोमार्चितं दिव्यं सुसंमृष्टानुलेपनम् |  २६   क
दिव्यपुष्पोपहारैश्च सर्वतोऽभिविराजितम् ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति