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शान्ति पर्व
अध्याय १४५
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भीष्म उवाच
यापि चैवंविधा नारी भर्तारमनुवर्तते |  १५   क
विराजते हि सा क्षिप्रं कपोतीव दिवि स्थिता ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति