आदि पर्व  अध्याय १४५

वैशम्पाय़न उवाच

मथ्यमानेव दुःखेन हृदय़ेन पृथा ततः |  ११   क
उवाच भीमं कल्याणी कृपान्वितमिदं वचः ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति