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अनुशासन पर्व
अध्याय १४३
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भीष्म उवाच
शुभाशुभं स्थावरं जङ्गमं च; विष्वक्सेनात्सर्वमेतत्प्रतीहि |  ४१   क
यद्वर्तते यच्च भविष्यतीह; सर्वमेतत्केशवं त्वं प्रतीहि ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति