अनुशासन पर्व  अध्याय १४२

व्राह्मणा ऊचुः

अहो व्राह्मणकर्माणि यथा मारुत तत्त्वतः |  २२   क
त्वय़ा प्रोक्तानि कार्त्स्न्येन श्रुतानि प्रय़तेन ह ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति