अनुशासन पर्व  अध्याय १४०

भीष्म उवाच

एवं सेन्द्रा वसिष्ठेन रक्षितास्त्रिदिवौकसः |  २५   क
व्रह्मदत्तवराश्चैव हता दैत्या महात्मना ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति