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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १४
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वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्तास्तु ते राज्ञा सर्व एव महर्षय़ः |  १२   क
अभ्यनुज्ञाप्य राजानं तथोभौ कृष्णफल्गुनौ |  १२   ख
पश्यतामेव सर्वेषां तत्रैवादर्शनं यय़ुः ||  १२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति