अनुशासन पर्व  अध्याय १४

वासुदेव उवाच

प्रद्युम्नचारुदेष्णादीन्रुक्मिण्या वीक्ष्य पुत्रकान् |  १३   क
पुत्रार्थिनी मामुपेत्य वाक्यमाह युधिष्ठिर ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति