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अनुशासन पर्व
अध्याय १४
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उपमन्युरु उवाच
काममेष वरो मेऽस्तु शापो वापि महेश्वरात् |  १०४   क
न चान्यां देवतां काङ्क्षे सर्वकामफलान्यपि ||  १०४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति