शान्ति पर्व  अध्याय १३९

भीष्म उवाच

जानतोऽविहितो मार्गो न कार्यो धर्मसङ्करः |  ५६   क
मा स्म धर्मं परित्याक्षीस्त्वं हि धर्मविदुत्तमः ||  ५६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति