आदि पर्व  अध्याय १३९

वैशम्पाय़न उवाच

आक्रम्य मानुषं कण्ठमाच्छिद्य धमनीमपि |  ७   क
उष्णं नवं प्रपास्यामि फेनिलं रुधिरं वहु ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति