आदि पर्व  अध्याय १३९

वैशम्पाय़न उवाच

एतद्विज्ञाय़ धर्मज्ञ युक्तं मय़ि समाचर |  २४   क
कामोपहतचित्ताङ्गीं भजमानां भजस्व माम् ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति